Tuesday, July 4, 2017

इश्क़ का बीज

लो मैंने बो दिया है
इश्क़ का बीज
कल जब इसमें फूल लगेंगे
वो किसी जाति मज़हब के नहीं होंगे
वो होंगे तेरी मेरी मुहब्बत के पाक ख़ुशनुमा फूल
तुम उन अक्षरों से मुहब्बत की नज़्म लिखना
मैं बूंदों संग मिल हर्फ़ हर्फ़ लिखूंगी इश्क़ के गीत
क्या ख़बर कोई चनाब फ़िर
लिख दे इतिहास
तेरे मेरे इश्क़ का नया सफ़्हा हो इज़ाद
आ बेख़ौफ़ इसे पी लें हम
आज़ अक्षर अक्षर जी लें हम...

हीर ...

14 comments:

विनोद कुमार पांडेय said...

अद्भुत अभिव्यक्ति ,बहुत दिनों के बाद आपके ब्लॉग पर आया ,अब निरंतर आपकी कविताएं पढ़ने को मिलेगी , आभार

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

चिनाब जैसा इतिहास नहीं कुछ ऐसा जहाँ मुहब्बत जीत जाये .हमेशा की तरह दिल को छूने वाली नज़्म

Kavita Rawat said...

आज़ अक्षर अक्षर जी लें हम...
बहुत सुन्दर
जो है आज है कल किसने देखा

संजय भास्‍कर said...

अद्भुत पंक्तियाँ बहुत दिनो के बाद आपको लिखते देखकर खुशी हुई।
बहुत सुन्‍दर भावों को शब्‍दों में समेट कर रोचक शैली में प्रस्‍तुत करने का आपका ये अंदाज बहुत अच्‍छा लगा,

vandana gupta said...

बहुत सुन्दर भाव समन्वय

सुशील कुमार जोशी said...

बहुत सुन्दर।

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (05-07-2017) को "गोल-गोल है दुनिया सारी" (चर्चा अंक-2656) पर भी होगी।
--
सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Khushdeep Sehgal said...

फूल की एक पंखुड़ी हम भी लेंगे...

जय #हिन्दी_ब्लॉगिंग...

ताऊ रामपुरिया said...

क्या कहूं? बस तीब बार पढना पडता है आपकी नज्म को, बहुत ही शानदार, बहुत शुभकामनाएं.
रामराम

कृपया कैप्चा हटा लीजिये प्लीज.
सादर

देवेन्द्र पाण्डेय said...

आपको पढना ही इश्क की छाँव में जाना है.

हरकीरत ' हीर' said...

कैप्चा ???
नहीं समझी ☺

Ashwini Kumar said...

आपकी कवितायेँ बहुत सुकून देती हैं। एक अर्से बाद आपको पढ़ा। आषाढ़ के इस उमस भरे दिन में पुरवाई का एक झोंका छू गया हो जैसे।

Arun Roy said...

बहुत अच्‍छा

Satish Saxena said...

बहुत खूब !
मंगलकामनाएं आपको !